प्रेम

कवितावार में रादमिला लाज़िक की कविता ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : आग्नेय

रादमिला लाज़िक

प्रेम

मैं सारी रात
अपने चाक़ुओं को धारदार
बनाती रही—
तुम्हारा स्वागत करने के लिए
उनके फलकों की दीप्ति में
और उनके बीच
मेरा प्रेम दमकता रहा
सिर्फ़ तुम्हारे लिए।

रादमिला लाज़िक (जन्म : 1949) सर्बियन कवयित्री-लेखिका हैं। उनकी कविता सामाजिक चेतना से संपन्न है और वह सीधे इस समाज और संसार को संबोधित है। यहाँ प्रस्तुत कविता प्रेम की क्रूरता का एक संक्षिप्त आख्यान है। यह कविता ‘द पेरिस रिव्यू’ के 213वें अंक में अमेरिकन कवि-आलोचक चार्ल्स सिमिक के अँग्रेज़ी अनुवाद में प्रकाशित हुई है। इसका यह हिंदी अनुवाद इस अनुवाद पर ही आधृत है। आग्नेय हिंदी के समादृत कवि-लेखक-अनुवादक और ‘सदानीरा’ के प्रधान संपादक हैं।

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1 टिप्पणी

  1. प्रेम भले छोटी कविता है लेकिन कविता का असर गहरा है।
    आग्नेय जी का अनुवाद लाजवाब है।

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