पैरोडियाँ :: पंकज प्रखर
Posts tagged लोक
राम को बहुत चाहने वाले को विरह मिलता है पर शोक नहीं
कविताएँ :: सुघोष मिश्र
हवा की शून्य गहराइयों में रात की उन्मुक्त बाँसुरी
नीलमणि फूकन की कविताएँ :: असमिया से अनुवाद और प्रस्तुति : कल्पना पाठक
आँखों पर पर्दा हो तो कितना सुखमय है संसार
कविताएँ :: अरुण आदित्य
पीछे कुछ नहीं है कुछ नहीं के सिवा
लंबी कविता :: तल्हा ख़ान
अब्बास ग़ायब है
लंबी कविता :: ज़ुबैर सैफ़ी