आनीस कोल्ट्स की कविताएँ ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : रुस्तम सिंह

कठोर भू-दृश्य
इस पारदर्शी दिन में
प्रकाश पत्थरों पर बैठा है
यदि तुम धरती को छूते हो
वह टुकड़ों में बिखर जाती है
वाणी गर्मी से फट जाती है
इस कठोर भू-दृश्य में
अपनी यायावरी को जारी रखना
जो रुकता है
वह खो जाता है
पत्थर के औज़ार
मैं तुम्हारी स्मृतियों में उतर जाती हूँ
जब तुम ऊँघने लगते हो
अपना नाम
तुम्हारे नाम में रख देती हूँ
तुम्हारी स्मृतियाँ
धुँधली होती जाती हैं
और मैं तुम्हें उस प्रागैतिहासिक
गुफा में ले जाती हूँ
जहाँ मैं रहती हूँ
पत्थर के अपने औज़ारों के साथ
जो आग पैदा करते हैं
हज़ारों अहरनें
भविष्य अब मेरा नहीं है
मैंने अपनी आत्मा शैतान को बेच दी है
मेरे ख़ून में गूँजती हैं
एक हज़ार अहरनें
बिना किसी लोहार के
अपनी माँ को
तुमने मेरे मुँह को
शब्दों से भर दिया
जिन्हें मैं नहीं जानती थी
वे किस काम के थे?
कल की ज़ुबान
आज की नहीं है
और तुम्हारा ख़ून भी
जिसने मुझे जन्म के समय
चिह्नित किया था
अब तुम्हारा नहीं है।
अंतहीन
तुम्हारी देह मेरे साथ-साथ भागती है
एक नदी की तरह
मेरी त्वचा अंतहीन है
मुझमें से गुज़रते हुए
तुम मुझे पत्थरों से गर्भित कर देते हो
चाँद
मैं मृतकों की रूहों में घुस जाती हूँ
और उनकी बेचैन यात्राओं को जारी रखती हूँ
चाँद चकराने
लगता है
पेड़ों में बैठता है
और रात के
पक्षियों के साथ
पुकारता है
विश्वासघात
घूमती हुई पृथ्वी की तरह अकेले
हम ख़ला में घूमते हैं
टूटे पंखों वाले
मर्त्य देवदूत
हमारे साथ विश्वासघात किया है
एक ईश्वर ने
जो मारता है
मारता है
मारता है
कौन लिखता है?
मुझे वाणी का नशा है।
उसके बोझ के नीचे मैं सो जाती हूँ।
क्या यह मैं हूँ जो कविता लिखती हूँ?
क्या यह कविता है जो मुझे लिखती है?
रात्रि-जानवर
तुम मेरे मुँह मेँ
बारिश को पीते हो
तुम्हारी जंगली साँस
मेरी त्वचा को छूती है
तुम्हारा पूरा स्वभाव
मुझ पर भड़कता है
रात्रि-जानवर
मैं तुम्हारे
चरागाहों में घूमती हूँ
बातें बंद करो
मुझे समझे बिना ही
तुम मेरा अनुवाद करते हो—
बातें बंद करो
शब्दों को थूक दो
आओ हम अपनी देहों को मिला दें
आओ हम ब्रह्मांड को रोक दें
प्रस्तावना
जीवन लंबी शांत नदी नहीं है
बल्कि ख़ून-ख़राबा है
फिर भी तुम कहते हो
कि मैं फूलों से सजी
नन्हे पक्षियों से सजी
कविताएँ लिखूँ
क्षमा करें देवियो और सज्जनो
मेरी हर कविता
आपको दफ़ना देती है
आग
भागो उसने कहा
पूरे शहर में आग लगी हुई है
वह आदमी जल रहा था
कहाँ जाऊँ
मैंने पूछा
समुद्र में उसने उत्तर दिया
मैं भी जलने लगी
फास्फोरस की तरह
मेरी आँखें हेड-लाइट जैसी थीं
आकाश
मेरा जीवन एक किताब है
जो मैंने नहीं लिखी
पृष्ठ दर पृष्ठ
मैं इसे अपनी इच्छा के विरुद्ध पढ़ती हूँ
मुझे पता नहीं होता
कि मुझे क्या अनुभव होगा
क्या चीज़ मेरा इंतिज़ार कर रही है
मैं एक पागल ईश्वर का दुःस्वप्न हूँ
शाम के समय : कुत्ते और भेड़िये के बीच
रात
से परे एक रात
हमारा इंतिज़ार करती है
रात
जो सारे ज्ञान से परे है
वह हमें
अपने ब्लैकबोर्ड से पोंछ देती है
हम तब तक ही अमर हैं
जब तक हम ज़िंदा हैं
तुम ही हो
तुम ही हो
जिसके साथ मैं जूझती हूँ
नर्क के बिस्तर पर
मेरी भयानक रातों के फ़रिश्ते
तुमने मुझे बदल दिया है
अब मैं आग निगलती हूँ
स्मृति
मेरी स्मृति भारी है
डूबते हुए एक जहाज़ की तरह
मैं पूरी दुनिया में
भटकती रही
देवताओं ने मेरा गला काट दिया
मैंने उनका—
उनके मुँहों में,
उनकी आँतों में
लिखते हुए
मैं कविता भूल गई—
मैं कवि बन गई
पुस्तकें
चाँद ने मेरी पुस्तकों को ज़हरीला कर दिया है
अब मैं शब्द नहीं ढूँढ़ पाती
ख़ाली पन्ने
भेड़ियों की तरह
मुझे देखते हैं और मेरा पीछा करते हैं
विलाप
मेरा कोई भी विलाप
सुना नहीं जाएगा
भगवान बहरा और गूँगा है
किसी ने भी हमें
इशारों की भाषा
नहीं सिखाई
सपने
जब मैं जागती हूँ
तो मैं अपने सपनों के
पीड़ितों और मलबे को
इकट्ठा करती हूँ
और उन्हें अपने कमरे के
एक कोने में
रख देती हूँ
प्रतियाँ
जब मैं पैदा हुई
मेरी माँ ने
मेरी कई प्रतियाँ बनाईं
उनमें से कोई भी
मुझसे मिलती नहीं थी
उसी वक़्त
वह मुझे मृतकों में
ढूँढ़ने लगी
अस्तित्व
मेरे जड़-विहीन पैर
उस क्षितिज की तलाश में
पृथ्वी पर घूमते हैं
जो रहने लायक़ हो
जहाँ मैं अपनी खाल को रख दूँ
और जान सकूँ कि मैं हूँ
लाश
मैं जहाँ भी जाती हूँ
अपनी लाश को
अपने साथ ले जाती हूँ
हर शाम
मैं उसे डूबते सूरज को
अर्पित कर देती हूँ
हम दोनों मिलकर आकाश को
ख़ून से रँग देते हैं
सूरज
सूरज पक्षियों के लिए
जाल बिछाता है
और शाम को उन्हें निगल जाता है
उनकी परछाइयों को वह उगल देता है
लेखन
लेखन
असंभव में है
उसके साथ
मैं नरक को देखने जाती हूँ
मुँह
जब शब्द
मेरे मुँह में
नहीं रहेंगे
तब मैं इसे
पत्थरों से भर लूँगी
शब्द
हम अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं—
तुम मुझे प्रेम के शब्द सिखाते हो
जिन्हें मैं दिल से याद कर लेती हूँ
जब अकेली
मैं शीतनिद्रा में होती हूँ
वे मेरे बाल सफ़ेद कर देते हैं
आनीस कोल्ट्स [1928-2023] लक्ज़मबर्ग की महत्त्वपूर्ण कवि हैं। वह कविता के साथ-साथ अनुवाद और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय रहीं। उन्होंने बच्चों के लिए भी पुस्तकें लिखीं। उन्होंने अपनी शुरुआती पुस्तकें जर्मन भाषा में लिखीं, लेकिन बाद में वह फ़्रांसीसी में लिखने लगीं। इस तरह उनकी अधिकतर पुस्तकें फ़्रांसीसी में हैं। उनकी कविताएँ यूरोप की लगभग सभी भाषाओं में अनूदित हुईं और उन्हें अनेकों पुरस्कार प्राप्त हुए। यहाँ प्रस्तुत कविताएँ हिंदी-अनुवाद हेतु अनीस कोल्ट्स की अँग्रेज़ी में अनूदित कविताओं के संग्रह Anise Koltz, At the Edge of Night [Arc Publications, Todmorden, Uk, 2009] से ली गई हैं, जिनका मूल फ़्रांसीसी से अँग्रेज़ी अनुवाद Anne-Marie Glasheen ने किया है। रुस्तम सिंह से परिचय के लिए यहाँ देखिए : रुस्तम