ख़ोसे एमिलियो पाचेको की कविताएँ ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : उज्ज्वल देशवाल

ख़ोसे एमिलियो पाचेको | तस्वीर सौजन्य : zenda

कवियों का जीवन

कविताई में अंत सुखद नहीं होता
कवि मर जाते हैं
अपने पागलपन को जीते हुए
वे बे-बुद्धि जानवरों की तरह खंडित हो जाते हैं
[जैसे डारियो हुआ] मार दिया जाता है
उन्हें पत्थर मार-मारकर
या वे हवा हो जाते हैं
अपने को समुद्रों में फेंक कर
या साइनाइड मुँह में धर कर
या वे मर जाते हैं शराब से
या ड्रग से
या ग़रीबी से
या कुछ इससे बदतर
कवि कहलाए जाने वाले कवि
क़ब्रों के चिड़चिड़े रहतवान1कौरवी-हरियाणवी का शब्द जिसका अर्थ है : रहवासी या रहने वाला। होते हैं पुस्तक पूरी करने को प्रतिबद्ध।

देशद्रोह

मुझे अपने देश से प्यार नहीं है
मेरी समझ से परे हैं
इसके पेचीदगी भरे ठाठ-बाट
फिर भी
[जबकि यह सुनने में अजीब लगेगा] मैं अपनी जान दे सकता हूँ
इसकी दस जगहों के लिए
कुछ चुनिंदा लोगों के लिए
बंदरगाहों, जंगलों, रेगिस्तानों, क़िलों के लिए,
एक उजड़ते, धूल हो चुके भयानक शहर के लिए,
कुछ गुज़र चुकी हस्तियों,
पहाड़ों और तीन या चार नदियों के लिए।

डिख्टरलीबे2डिख्टरलीबे यानी कवि का प्रेम [1840 में रचित], रॉबर्ट शुमान के प्रसिद्ध गीतों का समूह है।

कविता का एक ही सच है बस—दुख
बॉदलेयर इसकी गवाही देगा
ओविड भी हामी भरेगा
और इसका दूसरा पहलू यह कि
यही बात इस मरती हुई कला की जान है
इसके पढ़ने वाले बहुत कम हैं
बहुत ज़्यादा करते हैं इससे नफ़रत
जैसे यह कोई मानसिक बीमारी हो
या बची-खुची बातें
हमारे समय से किसी बहुत पुराने समय की
हमारा समय कि जिसमें
विज्ञान ने जादू पर किया है
अपनी जीत का दावा।

झींगुर
कविता का बचाव और उसकी तस्वीर

झींगुरों की मिसाल लेते हैं
उनकी सरसराहट बे-उम्मीद है
उनके पंखों की फड़फड़ाहट का
कोई भी मतलब समझ नहीं आता
लेकिन वे जो एक दूसरे को भेजते हैं
उसी समझ न आने वाले
सिग्नल के बिना
उनके लिए रात
रात नहीं होगी।

कविता की आलोचना

यहाँ भी वही बारिश
और उसका ग़ुस्सैल घना जंगल है
नमक
खंडहर हुआ समुद्र…

ऊपर वाली पंक्तियों को काट कर
उनकी जगह ये लिखीं :
उफान मारता समुद्र,
उसके बलखाते,
पहले से चले आते रीति-रिवाज

ये पंक्तियाँ भी हज़ारों बार कविताओं में आ चुकी हैं

[कीड़े पड़ी कुतिया,
खजही कविता,
इस क़दर हँसाने वाला न्यूरोसिस,
यह वह क़ीमत है जो कुछ लोग अदा करते हैं
जीना न जानने के लिए।
मीठी, अजर-अमर, रौशन-ज़ेहन कविता]

शायद यह कविता लिखने का सही समय नहीं है
हमारे समय ने
हमें अपने आपसे बात करते हुए छोड़ दिया है।

नमक

यदि तुम इसकी आत्मा,
इसके आशय
दुनिया में इसके फ़ायदों को
परखना चाहते हो
तो तुम्हें इसे इसकी पूर्णता में देखना होगा

नमक
यह अकेले टुकड़ों से नहीं बना है
बल्कि यह समग्र है
जिसके यकता टुकड़े कुछ नहीं के बराबर होंगे
अकल्पनीय ब्लैक होल में समाते हुए

नमक समुद्र से आता है
नमक समुद्र का पत्थर हो चुका झाग है
नमक सूरज द्वारा सुखाया गया समुद्र है

समुद्र आख़िर तक आते-आते
होता है थका-माँदा
अपनी बेइंतिहा पनियाई ताक़त से दूर
रेत में पत्थर बनने को मर जाता है

नमक वह रेगिस्तान
जहाँ पहले कभी समुद्र हुआ करता था
धरती और पानी मिल जाते हैं
और किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ता

और नमक ही है जिसके ज़रिये
दुनिया को पता चलता है
कि ज़िदा होने का क्या मतलब है।


ख़ोसे एमिलियो पाचेको [1939-2014] सुप्रसिद्ध मैक्सिकन कवि हैं। उनकी यहाँ प्रस्तुत कविताएँ अँग्रेज़ी से हिंदी में अनुवाद करने के लिए LARB से चुनी गई हैं। उज्ज्वल देशवाल नई पीढ़ी लेखक-अनुवादक हैं।

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